"चल अविनाश अब चलते है मन की उड़ान हम भरते हैं. बंद आँखों की बातो को,अल्हड़ से इरादों को, कोरे कागज पर उतारेंगे अंतर्मन को थामकर,बाते उसकी जानेंगे चल अविनाश अब चलते है मन की उड़ान हम भरते है"
बुधवार, 22 फ़रवरी 2023
एक कविता किसी मन से निकले
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023
मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023
'पर्वतों से कोई नदी निकली थी'
शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023
गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023
सोमवार, 30 जनवरी 2023
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नदियों के लिए,
कोई मंथन नही करना पड़ता।
धरा का अमृत,
पर्वतों से फूटकर बहने लगता है।
धरती की ममता
स्त्री की ममता से कहीं विशाल है
कब चलाएगा कोई,
धरतीवाद का आंदोलन! 💙
- अविनाश कुमार तिवारी
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संघर्ष सबके थे,
कहानियाँ उनके संघर्षों की बनीं।
जिन्होंने कोई मुकाम पा लिया।
प्रयास सबके थे,
साख उनके प्रयासों को मिली।
जिन्होंने ने सफलता को पा लिया।
समय कोशिशों से ज्यादा,
उनके परिणाम देखता है।
ये बात धूमिल हो गई थी,
कौन मंजिल के करीब आकर चूका था।
जिसने उसको हासिल किया,
इति श्री बाद में नाम तो उसी का गूंजा था।
मै नही कहता किसी को
"कर्म करो फल की चिंता मत करो"
फल को न चूका जाने वाला लक्ष्य बनाओ
कार्य के परिणाम की बराबर चिंता करो।
- अविनाश कुमार तिवारी
"नई नस्लों का जीवन धन्य कर दो"
तितलियों में थोड़ी और रंगत भर दो। जुगनुओं में थोड़ी और चमक भर दो। फूलों को ज्यादा खुशबुएँ दे दो। हिमानियों को अधिक सुदृढ़ कर दो। जल धाराओं को अ...
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हर रोज मरता हूँ, हर रोज जीता हूँ। न मैं मर पाया पूरा, मेरा जीना भी रह गया थोड़ा। कुछ तो रह गया अधूरा। जीना भी है, और मरना भी है। ये अवश्यसंभा...
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"खुद से खुद का चल रहा द्वन्द है। वर्तमान की भावनात्मक पूर्ति, और भविष्य की मजबूत जमीन के बीच प्रतिद्वंद है। एक ओर जिंदगी के हर ...
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न नीरज का करुणगान रहा। न निराला के अब मुखर मुक्तक हैं। चुप है पंत का प्रकृति चित्रण। ओझल है महादेवी की कविता सुंदरी। न दिनकर का सूर्यतेज रहा...