शनिवार, 13 अगस्त 2016

स्वतंत्रता

जहाँ हवा में बहती सदभावना हो,
जहाँ कण-कण में विद्यमान एकता हो,
बनु मै हिस्सा उस भारत का,
जहाँ जर्रे-जर्रे में स्वतंत्रता हो।
जहाँ न जात-पात का बंधन हो,
जहाँ न ऊँच -नीच का संस्तरण हो,
बनु मै हिस्सा उस भारत का,
जहाँ फक्र से उठा हुआ हर सर हो।
जहाँ न वैश्मन्य का कोई अंश हो,
मानवता से ओत -प्रोत हर तंत्र हो,
बनु मै हिस्सा उस भारत का,
जहाँ प्रेम से भरा सभी का मन हो।
मै स्वार्थ से दूर हो जाऊँ,
अभिमान से विलग हो जाऊँ,
बनु मै हिस्सा उस भारत का
जहाँ दया और विवेक का वास हो।
जब इन बातो को पा जाऊँगा,
तब मैं स्वतंत्र कहलाऊंगा,
मायने क्या है स्वतंत्रता के,
तब दुनिया को बतलाऊंगा। "

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

स्वमेव

"बह जाऊ कहीं,
उड़ जाऊ कहीं,
ना किसी का जिक्र,
ना किसी की फ़िक्र,
कहना भी मेरा हो,
सुनना भी मुझको हो,
ना किसी से कुछ चाहत हो,
ना किसी की आदत हो,
बस खुद से उम्मीदे,
टूटना भी खुद से हो,
रूठना भी खुद से हो,
बस जो हो मेरा हो,
सिर्फ मेरा हो,
दुनिया से ना कुछ लेना हो,
दुनिया को ना कुछ देना हो,
मुझ संग राते मेरा ही सवेरा हो।"

शनिवार, 25 जून 2016

शीर्षक रहित

"कुछ को मिल गए,
कुछ को मिलने बाकि है,
भावनाएं बहूत सी हैं
कतार में,
बाँट जोह रही शब्दों की।"

रविवार, 12 जून 2016

स्वयं की तलाश

कुछ गहरा
कुछ अप्रत्याशित सा
अभी खुद से हु
अंजान जरा।
कभी पोखर सा हु
बंधा हुआ,
कभी सागर सा अथाह हु मैं।
कभी उजला हु सबेरे सा,
कभी अंधला हु अँधेरे सा।
है असीमित इक्षाए भी,
है जज्बा भी अनंत सा,
चाह भी है असंभव की
कोसिस भी है हर सम्भव की।"

गुरुवार, 2 जून 2016

देवता और शैतान

"देवता और शैतान दोनों
अंतर्मन में समाहित हैं|
एक नैतिकता का
पथदृष्टा है,
दूजा अनीति का
सहवृत्ता है।
ऊर्जा दोनों से
प्रचुर है,
साधन दोनों के अपूर्व है।
एक चरित्र का निर्माण है,
दूजा पतन का आगाज है।
चुनाव स्वंय के हाथ है,
के अब हम
सुनीति के साथ है
या अनीति के सम-भाग हैं।"



शनिवार, 19 सितंबर 2015

नज्म-2

"जरा वाजिब था,
कुछ गैर जरुरी सा,
अफ़साना ये दिल का फिजूल था.
तेरे रुखसार की आहटे,
सलवटों में सिमट गयी,
कुछ पल को.
चुभती सी आह एक ,
बाकि रह गयी.
अनकही सी बात एक,
बाकि रह गयी.
ना मुकम्मल हुआ,
ना खत्म हुआ.
थम सा गया,
सब एक लम्हे में "

"नई नस्लों का जीवन धन्य कर दो"

तितलियों में थोड़ी और रंगत भर दो। जुगनुओं में थोड़ी और चमक भर दो। फूलों को ज्यादा खुशबुएँ दे दो। हिमानियों को अधिक सुदृढ़ कर दो। जल धाराओं को अ...