"चल अविनाश अब चलते है मन की उड़ान हम भरते हैं. बंद आँखों की बातो को,अल्हड़ से इरादों को, कोरे कागज पर उतारेंगे अंतर्मन को थामकर,बाते उसकी जानेंगे चल अविनाश अब चलते है मन की उड़ान हम भरते है"
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"नई नस्लों का जीवन धन्य कर दो"
तितलियों में थोड़ी और रंगत भर दो। जुगनुओं में थोड़ी और चमक भर दो। फूलों को ज्यादा खुशबुएँ दे दो। हिमानियों को अधिक सुदृढ़ कर दो। जल धाराओं को अ...
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हर रोज मरता हूँ, हर रोज जीता हूँ। न मैं मर पाया पूरा, मेरा जीना भी रह गया थोड़ा। कुछ तो रह गया अधूरा। जीना भी है, और मरना भी है। ये अवश्यसंभा...
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एक खुला चारागाह था वो। जानवरो के कूछ झुंड पहले से वहीं थे। कुछ भोजन की तलाश में आते गए। कुछ सिमट कर रह गए। कुछ तादाद बढ़ाते गए। कुछ वापस ...
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(पीड़ाएँ ) पीड़ाएँ कभी लुप्त नही होतीं उनकी अनदेखी कर दी जाती है। * (वेदनाएँ) वेदनाएँ कभी मृत नही होतीं हमारे आँसू संकीर्ण हो जाते हैं। ** (सं...